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ताना बाना  | 09.03.2010

आसमान पर चढ़ा कार बाज़ार

 

भारत में कार का बाज़ार रातों रात आगे बढ़ रहा है और फ़रवरी में घरेलू बाज़ार में सारे रिकॉर्ड टूट गए. फ़रवरी भारत में सबसे ज़्यादा कार बिकने वाला महीना साबित हुआ और जानकारों का कहना है कि बजट से आशंकाएं भी इसकी वजह बनीं.

 

भारतीय ऑटोमोबाइल मैन्यूफ़ैक्चरर्स यानी सियाम के आंकड़ों के मुताबिक़ फ़रवरी में भारत में 1,53,845 कारें बिकीं, जो पिछले साल इस वक्त के 1,15,505 कारों से लगभग 33 फ़ीसदी ज़्यादा है. इसके साथ ही कार बाज़ार ने लगातार 11 वें महीने आगे का रुख़ किया है. Bildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift:  

फ़रवरी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. इसी साल जनवरी में भी 1,45,905 कारें बिकी थीं. हालांकि यह बात भी ध्यान देने लायक़ है कि फ़रवरी महीने में जनवरी के मुक़ाबले तीन दिन कम थे. फ़रवरी के महीने में सभी बड़ी कंपनियों मारुति सुज़ूकी, ह्यूंदे मोटर्स और जनरल मोटर्स ने अपना सबसे अच्छा कारोबार किया है.

सियाम के महानिदेशक दिलीप चिनॉय ने कहा, "ऑटो उद्योग में ज़्यादा बिक्री की वजह यह भी थी कि लोगों को लग रहा था कि बजट में एक्साइज़ ड्यूटी बढ़ा दी जाएगी. इसके अलावा कुछ मांग भी बढ़ी."

भारत में कुल गाड़ियों की बिक्री भी बड़ी है. यह पिछले महीने 11,29,783 हो गई, जो 2009 के इस महीने के मुक़ाबले 34.98 प्रतिशत की वृद्धि है. पिछले साल यह महीना मंदी का दौर देख रहा था और उस वक्त सिर्फ़ 8,37,017 गाड़ियां बिकी थीं.

सियाम का दावा है कि मार्च में भी ज़बरदस्त गाड़ियां बिक सकती हैं क्योंकि अप्रैल से कड़े पर्यावरण नियम लागू हो सकते हैं.

रिपोर्टः पीटीआई/ए जमाल

संपादनः एस गौड़

 
 

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